जयंती पर विशेष, आधुनिक भारत के साहित्य का एक चमकता हुआ प्रमुख नाम

BTV डेस्क. आज हिंदी साहित्य के सबसे प्रमुख लेखकों में से एक मुंशी प्रेमचंद की जयंती हैं. सबसे ज्यादा उत्सुकता मुंशी प्रेमचंद के मूल नाम को लेकर रहती हैं. 31 जुलाई 1880 में अंग्रेजो की हुकूमत के समय उत्तरप्रदेश के ऐतिहासिक शहर वाराणसी जिले के लमही गांव में एक जमींदार कायस्थ परिवार में जन्म लेने वाले धनपत राय श्रीवास्तव शुरुआती लेखन उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखने लगे और बाद में हिंदी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद के नाम से लोकप्रिय हुए. मुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू दोनों ही भाषाओं में प्रमुख कहानीकार, उपन्यासकार और लेखक-विचारक के रूप में ख्यात हुए.

प्रमुख फिल्में – 1934 में आई मजदुर फिल्म से लेकर, सेवासदन (1938), गो-दान (1963), ग़बन(1966), हिरा मोती (1959), लोकप्रिय फ़िल्म शतरंज के खिलाड़ी(1977) तथा सद्गति (1981) समेत कई अन्य भाषाओं में बनी हैं.

मुंशी प्रेमचंद का लेखन आधुनिक पीढ़ी और भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक बेमिसाल तोहफ़े जैसा हैं. मुंशी का लिखा आज की नयी पीढ़ी बहुत पसंद करती हैं. उनके 15 उपन्यास , सैकड़ो कहानियां , नाटक, अनुवादन, सम्पादकीय व पत्रों का खजाना हैं.

‘ईदगाह’ से आधुनिक पीढ़ी का लगाव
मुंशी प्रेमचंद की लिखी हामिद के किरदार वाली कहानी से पुरे भारत में जिस तरह लोकप्रिय हुई उसने बच्चों से लेकर हर एक आयुवर्ग तक इसे पंहुचा दिया था.

उपेक्षित हैं प्रेमचंद का पैतृक घर – राष्ट्रीय स्मारक की ऐसी दुर्दशा कि देश का साहित्य बिना आंसुओ के रोता हैं
मुंशी प्रेमचंद के पैतृक घर को 2005 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया था परन्तु प्रशाषन की उपेक्षाओं और उदासीनता का शिकार हैं जहाँ न बिजली हैं न कोई व्यवस्थाऐं.

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षैत्र में हैं मुंशी प्रेमचंद राष्ट्रीय स्मारक
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वला योजना के दौरान मुंशी की ईदगाह का जिक्र किया था उम्मीद हैं देश के महान साहित्यकार के जन्मस्थान जो कि राष्ट्रीय स्मारक हैं , की दशा सुधरेगी.

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