श्रीनगर. पाकिस्तान की फ़ितरत हैं कि वह कश्मीर या भारत से जुड़े किसी भी मुद्दे पर रोने न रोंए तो उनकी आतंरिक राजनीति नहीं चलती इस कारण पाकिस्तान एक भी मौका नहीं गंवाना चाहता इसी कड़ी में कश्मीर के अलगाववाद का मुख्य चेहरा सैयद अली शाह गिलानी की मौत पर भी ऐसे रो रहे हैं जैसे उनका कोई अपना चले गया हो. आखिर इमरान रोएं भी क्यों ना अब उनके एक-एक करके सभी विश्वासपात्र जो कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद बढ़ाने में मदद करते थे वे कम होते जा रहे हैं.
ज्ञात हो कि 1 सितंबर को शाह की मौत हुई थी. गिलानी ने कश्मीर में अलगाववाद को चरम पर पहुंचाया था और पाकिस्तान की मदद से हजारों युवाओं को गलत रास्ते पर लाने का काम किया. धारा 370 और 35A के हटने के बाद से ही गिलानी कई और अलगाववादियों की तरह नजरबन्द थें. गिलानी को गतवर्ष पाकिस्तान ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भी दिया था जिससे ये साबित होता है कि वो कितने वफ़ादार बनकर पाक के मंसूबो को अंजाम दे रहे थे .
गिलानी जमात-ऐ-इस्लामी कश्मीर के मेंबर थे बाद में उन्होंने तहरीक़-ऐ-हुर्रियत नाम से पार्टी बनाई. अभी गिलानी अलगाववादियों के ग्रुप हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष थें.
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने गिलानी की मौत कहा कि पाकिस्तान उनके कार्यो और संघर्षो को याद रखेगा साथ ही कहा कि वो एक फ्रीडम फाइटर थें.

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